कैंसर होने का कारण

*जापान सरकार ने इस साल के अंत से पहले देश में सभी “माइक्रोवेव ओवन” का निपटान करने का फैसला किया है। *

  • हिरोशिमा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि माइक्रोवेव ओवन से “रेडियो तरंगें” सितंबर 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिकी परमाणु बमों की तुलना में पिछले बीस वर्षों से अधिक नुकसान पहुंचा रही हैं। *
  • विशेषज्ञों ने पाया है कि माइक्रोवेव ओवन में पकाए गए गर्म भोजन में बहुत अधिक अवांछित कंपन और विकिरण होते हैं। * *जापान में सभी “माइक्रोवेव ओवन” कारखाने बंद हो रहे हैं। *
  • दक्षिण कोरिया ने 2021 तक “माइक्रोवेव ओवन” कारखानों और 2023 तक चीन को बंद करने की योजना की घोषणा की। * काशीरा कैंसर केंद्र में कैंसर की रोकथाम पर एक सम्मेलन में निम्नलिखित सिफारिशें की गईं:
  • 1. रिफाइंड तेल बंद। *
  • २. पशु मूल का दूध बंद करें। * (सोया दूध अनुशंसित)
  • 3. फ़ूड क्यूब बंद* (चिकन शोरबा मसाले जैसे मैगी आदि)
  • 4. सोडा ऑफ * (चीनी के 32 टुकड़े प्रति लीटर)
  • 5. रिफाइंड चीनी*
  • 6. माइक्रोवेव ओवन बंद*
  • 7. जन्म से पहले, मैमोग्राम बंद (इकोकार्डियोग्राफी को छोड़कर)। *
  • 8. बहुत संकीर्ण अंडरवियर और ब्रा बंद होना *
  • 9. शराब बंद करो। *
    1. पिघला हुआ भोजन फिर से लगाना बंद करें। *
  • 1 1। फ्रिज में रखी प्लास्टिक की बोतलों में रखा ठंडा पानी पीना बंद कर दें। *
    1. शेविंग या नहाने के बाद डियोड्रेंट का इस्तेमाल बंद कर दें।
      इन सभी चीजों को रोकने की सलाह दी जाती है क्योंकि इनसे कैंसर होता है।
  • यह सम्मेलन आपके आहार में निम्नलिखित वस्तुओं को शामिल करने की सिफारिश करता है: *
  • 1. सब्जियां *
  • २. चीनी की जगह शहद*
  • 3. प्लांट प्रोटीन * (मांस के बजाय बीन्स)
  • 4. सुबह खाली पेट अपने दाँत ब्रश करते समय शरीर के तापमान पर दो कप गर्म पानी पियें।
  • 5. खाना ठंडा नहीं होना चाहिए लेकिन मध्यम गर्म, ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए।
  • 6. एलोवेरा जूस + अदरक + अजमोद + अजवाइन + ब्रोमालिन (मिलाकर खाली पेट लें।) *
  • 7. दैनिक गाजर का रस *
  • 8. भोजन के साथ टमाटर, लहसुन प्याज* नोट: अमेरिकन फिजिशियन एसोसिएशन ने खोजा कैंसर के कारण:
  • 1. प्लास्टिक के प्याले में कुछ भी गर्म न पिएं*
  • २. कागज या गत्ते में या प्लास्टिक की थैली में लपेटकर कुछ भी गर्म न खाएं। (जैसे तले हुए आलू)*
  • 3. प्लास्टिक या माइक्रोवेव के बर्तन में न खाएं। *
  • ध्यान दें: *
  • जब प्लास्टिक गर्मी के संपर्क में आता है, तो रसायन 52 प्रकार के कैंसर को छोड़ सकते हैं। *
  • आपको कोला, पेप्सी, ईव, फेंटा जैसे सभी प्रकार के शीतल पेय पीने से भी बचना चाहिए, क्योंकि कैंसर चीनी खाता है! ताजा अनानास खाने के बाद भी अनानास का मिश्रण खाने से बचें। शाम 7 बजे के बाद भारी भोजन न करें।
  • सुबह अधिक पानी पिएं, शाम को कम। खाना खाने के तुरंत बाद न लेटें।(सोने न जाएं)* इस संदेश को अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

☘️ मल्टीग्रेन आटे में छिपा है सेहत का खजाना, घर पर करें तैयार

Health is Wealth:

1 अगर आप मोटापे से परेशान है, तो इस प्रकार से अपने लिए मल्टीग्रेन आटा तैयार करें – पांच किलो गेहूं में एक किलो चना, एक किलो जौ, 250 ग्राम अलसी और 50 ग्राम मेथीदाना मिलाकर पिसवाएं।

  1. अगर आप दुबलापन से निजात चाहते है, तो इस प्रकार से मल्टीग्रेन आटा तैयार करें – पांच किलो गेहूं में एक किलो चना, एक किलो जौ, 500 ग्राम सोयाबीन, एक किलो चावल का आटा डाल कर पिसवाएं। इस आटे के इस्तेमाल से आपको वजन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  2. अगर आपको कब्ज की शिकायत रहती हो तो इस प्रकार से मल्टीग्रेन आटा तैयार करें – पांच किलो गेहूं में एक किलो चना, आधा किलो मक्का, एक किलो जौ और 250 ग्राम अलसी पिसवाएं। इससे कब्ज से मुक्ति पाने में आपको मदद मिलेगी।
  3. जिन्हें डायबिटीज हैं वे इस प्रकार से मल्टीग्रेन आटा तैयार करें – पांच किलो गेहूं में डेढ़ किलो चना, 500 ग्राम जौ, 50 ग्राम मेथी, 50 ग्राम दालचीनी डालकर पिसवाएं।
  4. घर में बढ़ते बच्चे हो, तो उनके लिए इस प्रकार से मल्टीग्रेन आटा तैयार करें – पांच किलो गेहूं में 250 ग्राम सोयाबीन, एक किलो चना और 500 ग्राम जौ मिलाकर पिसवाएं। इससे बच्चों की अच्छी ग्रोथ होगी।

🇪🇬 21 मेधावी छात्र / छात्राओं को दो वर्ष के लिए साइंस पैक्टिकल के साथ नि:शूल्क कोचिंग🌈

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⭐ वैश्विक कोरोना महामारी को देखते हुए और श्रमिक वर्ग के अभिभावकगण की अपने बच्चो के लिए आकांक्षा को समझते हुए वीरेन्द्र सर द्वारा लिया गया महत्वपूर्ण फैसला – मेडिकल और ईन्जिनयरिंग की तैयारी करने वाले 21 मेधावी छात्र / छात्राओं को दो वर्ष के लिए साइंस पैक्टिकल के साथ
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VIRENDRA KUMAR SONI

नमन है घर की उस लक्ष्मी को जो घर को स्वर्ग बनाती है..

किसी ने क्या खूब लिखा ह,
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

बाबुल का घर छोड़ कर पिया के घर आती है..

एक लड़की जब शादी कर औरत बन जाती है..

अपनों से नाता तोड़कर किसी गैर को अपनाती है..

अपनी ख्वाहिशों को जलाकर किसी और के सपने सजाती है..

सुबह सवेरे जागकर सबके लिए चाय बनाती है..

नहा धोकर फिर सबके लिए नाश्ता बनाती है..

पति को विदा कर बच्चों का टिफिन सजाती है..

झाडू पोछा निपटा कर कपड़ों पर जुट जाती है..

पता ही नही चलता कब सुबह से दोपहर हो जाती है..

फिर से सबका खाना बनाने किचन में जुट जाती है..

सास ससुर को खाना परोस स्कूल से बच्चों को लाती है..

बच्चों संग हंसते हंसते खाना खाती और खिलाती है..

फिर बच्चों को टयूशन छोड़,थैला थाम बाजार जाती है..

घर के अनगिनत काम कुछ देर में निपटाकर आती है..

पता ही नही चलता कब दोपहर से शाम हो जाती है..

सास ससुर की चाय बनाकर फिर से चौके में जुट जाती है..

खाना पीना निपटाकर फिर बर्तनों पर जुट जाती है..

सबको सुलाकर सुबह उठने को फिर से वो सो जाती है..

हैरान हूं दोस्तों ये देखकर सौलह घंटे ड्यूटी बजाती है..

फिर भी एक पैसे की पगार नही पाती है..

ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत का मजाक उडाती है..

ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत पर चुटकुले बनाती है..

जो पत्नी मां बहन बेटी ना जाने कितने रिश्ते निभाती है..

सबके आंसू पोंछती है लेकिन खुद के आंसू छुपाती है..

नमन है घर की उस लक्ष्मी को जो घर को स्वर्ग बनाती है..

ड़ोली में बैठकर आती है और अर्थी पर लेटकर जाती है..

🙏🏻🌹🙏🏻😌

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इसे कहते हैं तकनीक का इस्तेमाल । वेदों के सभी महत्वपूर्ण स्त्रोत श्लोक 9 भाषाओ में । इस लिंक को टच करने पर आपको मिल जाएंगे ।
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कोई भी धार्मिक पुस्तक खरीदने की आवश्यकता नहीं है,इस अद्भुत लिंक में सबकुछ शामिल है।

सौभाग्य वृद्धि के लिये करें ये तीन उपाय : –

किस्मत, भाग्य, तकदीर, लक, प्रारब्ध, कर्मफल, योग, नियति…ये कुछ ऐसे बहुप्रचलित शब्द हैं जिनसे सभी परिचित हैं। कोई कितना भी मेहनती और सफल क्यों न हो जिंदगी में कभी न कभी ऐसे हालात अवश्य बन जाते हैं जब व्यक्ति को भाग्य और योग-संयोग की बातें सोचने और मानने पर मजबूर होना ही पड़ता है।कहते हैं कि वैसे तो कर्मों के फल को कोई नहीं रोक सकता, वह हर हाल में भोगना ही पड़ता है। लेकिन हमेशा से ही कुछ बातें या कहें कि शक्तियां ऐसी अवश्य ही रही हैं जिनके बल पर अनहोनी या असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। ऐसा ही संयोग दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के विषय में होता है। आइये जाने उन अकाट्य और अजैय शाक्तियों को जो बुरी से बुरी किश्मत को भी सौभाग्य में बदलने की क्षमता रखती है।

1. बह्मुहूर्त में जागरण : –

अभी तक आपका जो भी रुटीन रहा हो लेकिन कल से ही आप सूर्योदय से पहले हर हाल में बिस्तर छोड़ कर उठ जाएं। नित्य कर्मों से निपट कर साफ और सफेद रंग के वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की और मुंह करके बैठें और 15 से 20 मिनिट तक सुख-समृद्धि और प्रसन्नता का ध्यान करें।

2. कुंडलिनी शक्ति : –

योग-अध्यात्म में कुंडलिनी शक्ति को हमारे शरीर में मेरूदंड में स्थित बताया जाता है। मेरुदंड के अंतर्गत ही ऐसे गुप्त शक्ति केन्द्र होते हैं जिन्हें जगाकर साधक का सारा दुर्भाग्य मिटाया जा सकता है।

एकाएक कुंडलिनी का जागरण कर पाना किसी के लिये भी संभव नहीं होता है, इसीलिये व्यक्ति को कल से इस बात की शुरुआत अवश्य कर देना चाहिये कि वह जब भी जंहा भी बैठे अपनी रीढ़ को यानी मेरुदंड को हर हाल में सीधा रखे। कमर झुकाकर बैठने से कुंडलिनी शक्ति कुंद होने लगती है, जिससे इंसान दुर्भाग्य से जल्दी प्रभावित हो जता है।

3. 324 बार (तीन माला) गायत्री मंत्र का जप : –

गायत्री मंत्र की शक्तियों से आज सारी दुनिया और विज्ञान जगत भी परिचित है। आध्यात्मिक शास्त्रों की यह निश्चित मान्यता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन सूर्योदय के समय निश्चित समय, निश्वित स्थान पर विशुद्ध आसन पर बैठकर 3-माला गायत्री का जप करता है उसके सारे बुरे प्रारब्ध कर्मफलों का नाश हाने लगता है। तथा पहले दिन से दुर्भाग्य सौभाग्य में परिवर्तित होने लगता है।

शुभ प्रभात। आज का दिन आप के लिए शुभ एवं मंगलमय हो।

बेल के जूस का फायदे

स्वस्थ आयुर्वेद की प्रस्तुति👇🏻
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बेल का जूस किसे कहते है। इसके क्या फायदे होते है

बेल के पके हुए फल का गूदा को पानी में घोलकर रस बनाया जाता है और उसी रस को छानकर पीने में इस्तेमाल किया जाता है। खाली पेट बेल का जूस पीने के फायदे निम्नलिखित होते हैं लेकिन आप जानते है की बेल को अंग्रेजी में क्या कहतें हैं। बेल को अंग्रेजी में Bael कहते है। बेल का वैज्ञानिक नाम Aegle marmelos है। बेल के फल में विटामिन-B, विटामिन-C, प्रोटीन, ऊर्जा, आयरन, फैट, शुगर, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस इत्यादि जैसे पौष्टिक तत्व पाए जाते है।

सुबह खाली पेट बेल का जूस पीने के फायदे

आइये जानते हैं कि सुबह खाली पेट बेल का जूस पीने के फायदे क्या-क्या होते हैं और खाली पेट बेल का जूस पीने से कौन-कौन सी बीमारियाँ दूर होती हैं। आयुर्वेद के अनुसार सुबह खाली पेट बेल का जूस पीने के फायदे निम्नलिखित बताए गए हैं।

NO. 1 बेल का जूस पीने से खून साफ होता है।

NO. 2 स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है।

NO. 3 कैंसर से बचाव के लिए सहायक होता है।

NO. 4 गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाता है।

NO. 5 कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रण में रखता है।

NO. 6 दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाने में सहायक होता है।

NO. 7 दस्त और डायरिया की समस्या से राहत दिलाता है।

NO. 8 गैस और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है।

इसी तरह स्वास्थ्यवर्धक जानकारी के लिए होपधारा लाइब्रेरी के ग्रुप से जुड़े रहिये और अपने इष्टमित्रों को भी इस ज्ञान धारा में सम्मिलित करने हेतु इनसे जुड़ने की प्रेरणा लिंक भेजकर दें🙏🇮🇳

24 जून से 1 जुलाई तक झारखंड में बढ़ा स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा सप्‍ताह, जानिये क्‍या खुलेगा, क्‍या रहेगा बंद

रांची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज झारखंड मंत्रालय में आयोजित आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक की अध्यक्षता की। जिसमें अनलॉक-4 के लिए कई निर्णय लिए गए हैं। 24 जून से 1 जुलाई तक स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा सप्‍ताह बढ़ाया गया है। पहले की तरह ही सब जिलों में सभी दुकानें 4 बजे अपराह्न तक खुल सकेंगीl शॉपिंग माल और Departmental स्टोर भी खुल सकेंगेl सभी सरकारी एवं निजी कार्यालय 50% मानव संसाधन के साथ 4 बजे अपराह्न तक खुल सकेंगेl

अब बिंदुवार जानिये
-6 बजे तक सभी दुकानें ( सब्जी-फल – किराना की दुकान सहित) बंद रहेंगी l स्वास्थ्य सेवा से संबंधित प्रतिष्ठान और दूध के स्टोर खुले रहेंगे l
-शेष पाबंदी पूर्व की तरह जारी रहेंगी l

  • सिनेमा हॉल, क्लब, बार, banquet हॉल, मल्टीप्लेक्स, बंद रहेंगे l
    -स्टेडियम, gymnasium, स्विमिंग पूल और पार्क बंद रहेंगे l
    -समस्त शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे l
    -आँगन वाणी केंद्र बंद रहेंगे पर लाभुकों को घर पर खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी जायेगी l
    -5 व्यक्ति से अधिक के इकठ्ठा होने पर प्रतिबंध रहेगा l
    -विवाह में अधिकतम 11 व्यक्ति शामिल हो सकते हैं और अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 व्यक्ति l
    -धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे l
    -जुलूस पर रोक जारी रहेगी l
    -बस परिवहन पर रोक जारी रहेगी l
    -राज्य के द्वारा कराने वाली परीक्षा स्थगित रहेंगी l
    -मेला और प्रदर्शनी पर रोक जारी रहेगी l
    -निजी वाहन से एक जिले से दूसरे जिले जाने के लिए, दूसरे राज्य से झारखंड आने के लिए या झारखंड से दूसरे राज्य जाने के लिए ई पास आवश्यक होगा l
    -कुछ अपवाद को छोड़कर दूसरे राज्य से झारखंड आने वाले को 7 दिन का होम quarantine अनिवार्य होगा l
    -सार्वजानिक स्थान पर मास्क पहनना और सामजिक दूरी बनाए रखना अनिवार्य है l
    -आदेश के उल्लंघन की स्थिति में आपदा प्रबंधन अधिनियम की सुसंगत धारा अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी l

जीवन की सार्थकता

मैंने एक फूल से कहा:…
कल तुम मुरझा जाओगे:..!
फिर क्यों मुस्कुराते हो ..?
व्यर्थ में यह ताजगी …
किस लिए लुटाते हो ..??

फूल चुप रहा…!!

इतने में एक तितली आई ..!
पल भर आनंद लिया ..!
उड गई ..!!

एक भौंरा आया..!
गान सुनाया ..!
सुगंध बटोरी..!
और आगे बढ गया ..!!

एक मधुमक्खी आई..!
पल भर भिन भिनाई ..!
पराग समेटा ..! और …
झूमती गाती चली गई ..!!

खेलते हुए एक बालक ने …
स्पर्श सुख लिया ..!
रूप-लावण्य निहारा..!
मुस्कुराया..! और…
खेलने लग गया..!!

तब फूल बोला:—–
मित्र: !
क्षण भर को ही सही:…
मेरे जीवन ने कितनों…
को सुख दिया ..!
क्या तुमने भी कभी..?
ऐसा किया ..???

कल की चिन्ता में …
आज के आनंद में
विराम क्यो करूँ..?
माटी ने जो
रूप; रंग; रस; गंध दिए ..!
उसे बदनाम क्यो करूँ..?

मैं हँसता हूँ..! क्योंकि…
हँसना मुझे आता हैं ..!
मैं खिलता हूँ..! क्योंकि …
खिलना मुझे सुहाता हैं ..!

मैं मुरझा गया तो क्या ..?
कल फिर एक
नया फूल खिलेगा ..!
न कभी मुस्कान रुकी हैं .. नही सुगंध …!!

जीवन तो एक सिलसिला है ..!
इसी तरह चलेगा :!!

जो आपको मिला है …
उस में खुश रहिये ..!
और प्रभु का …
शुक्रिया कीजिए ..!
क्योंकि आप जो …
जीवन जी रहे हैं
वो जीवन कई लोगों ने …
देखा तक नहीं है..!

मुस्कुराते रहिये ..!
और सभी को …
खुश रखिए ..!!
स्वस्थ रहे, मस्त रहे,आनंद रहे*
क्योंकि# दोस्त हैं तो जिन्दगी है ❣❣❣❣❣❣❣
मास्क जरूर पहनिए अपने लिए और अपने परिवार के लिए।
बिहार सरकार के पुर्व नलकूप चालक एवं राष्ट्रीय जनता दल के नगर अध्यक्ष संतोष स्वर्णकार
गुड नाईट दोस्तों

गर्भ संस्कार

*भारतीय संस्कृति में मनुष्य के 16 संस्कारों का वर्णन किया गया है , इसमे गर्भ संस्कार भी एक संस्कार है !* *गर्भसंस्कार से तात्पर्य गर्भ में मौजूद भ्रूण पर सात्विक विचारो का प्रभाव डालना अर्थात भ्रूण को गर्भ में ही शिक्षित करना यानि अजन्मे शिशु की बुद्धि को शिक्षित करना !* *भारतीय परम्परा सदैव से मानती आई है कि गर्भ में पल रहे शिशु पर मां के व्यवहार , उसके आचरण , उसकी वाणी , बुद्धि का गूढ़ प्रभाव रहता है !* *कई कथाएं भी जो गर्भ में ही शिक्षा ग्रहण करने की बात को पुख्ता करती है जैसे अभिमन्यु प्रह्लाद आदि की कहानियों से स्पष्ट है उन्हें माँ के गर्भ में ही शिक्षा मिल गई थी !* *गर्भ संस्कार में बच्चे के जन्म से एक वर्ष पहले ही तैयारी शुरू की जाती है और उसके दो वर्ष तक के होने तक के लालन पालन में एक वैदिक विधि का पालन किया जाता है !* *मान्यता है कि गर्भसंस्कार से देवतुल्य संतान पैदा की जा सकती है , ये आज के नही पूर्वजो के कहै हुए कथन है !* *अगर आप भी संतान प्राप्ति की दिशा में है या भविष्य में इसके बारे में सोच रहे है तो हम जल्द ही गर्भसंस्कार पर एक आयोजन कर रहे है जिसको ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आयोजित किया जाएगा , इसके लिए आज ही अपना स्लॉट बुक करने के लिए सम्पर्क करें !* *हम आपको अच्छी तरह इसके बारे में बताएंगे , कार्यक्रम बिल्कुल निःशुल्क रहेगा लेकिन सीट की संख्या सीमित रहेगी , हमारे wtsapp नम्बर पर मेसेज करके अपनी सीट कार्यक्रम के लिए सुरक्षित कर लेवे !*

📞 99282 97065
📞 79760 73168
( व्हाट्सएप्प नम्बर )

नॉट – सीट बिना किसी भेदभाव के पहले आओ , पहले पाओ के आधार पर आवंटित की जाएगी !

सौजन्य से —
राजकुमार जैन
श्रीधेनु आयुर्वेद फार्मा , हनुमानगढ़ ( राज.) !

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

विनाशपर्व

‘अंग्रेजों ने नष्ट किया भारत का समृध्द नौकायन उद्योग’ / १
लेखक:- प्रशांत पोळ

किसी जमाने मे भारत, विश्व व्यापार मे सिरमौर था. भारत मे बने हुए जहाज और नौकाएं, सारी दुनिया मे व्यापार के लिए जाते थे. हमारे पुरखों ने बनाएं हुए जहाज और नौकाएं, अनेक देशों मे खरीदी जाती थी. ‘सबसे अच्छे और प्रगत किस्म के जहाज बनाने वाला देश’ ऐसी हमारे देश की ख्याति थी…

किंतु अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा करने के बाद, धीरे – धीरे हमारा जहाज बनाने का विश्व प्रसिध्द उद्योग नष्ट किया. उसी षडयंत्र की गाथा. . .
प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. अंगस मेडिसन ने अपने ग्रंथ ‘द हिस्ट्री ऑफ वर्ल्ड इकॉनोमिक्स’ में विश्व के व्यापार की परिस्थिति भिन्न – भिन्न कालखण्डों में क्या थी, इसका प्रत्यक्ष प्रमाणों के साथ वर्णन किया हैं. इनके अनुसार, आज से २,००० हजार वर्ष पहले, अर्थात पहली शताब्दी में विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा ३२% था, जो वर्ष १००० में, अर्थात ग्यारहवी शताब्दी के प्रारंभ में २८% था. उन दिनों, भारत विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक देश था. जाहीर हैं, भारतीय व्यापारी कपड़े, मसाले, रेशम आदि माल को जहाजों में लाद कर विश्व के कोने – कोने में जाते थे.

भारत मे, समुद्री जहाज से किए हुए प्रवास को ‘नौकानयन’, ‘नौकायन’ या प्राचीन काल से ‘नवगति’ कहा जाता हैं. ‘नवगति’ यह संस्कृत शब्द हैं. इसी शब्द के आधार पर अंग्रेजी समानार्थी शब्द ‘नेविगेशन’ तैयार हुआ, ऐसा माना जाता हैं. भारत में प्राचीन समय में नौकायन शास्त्र अत्यंत उन्नत स्वरूप में था.

इसके अनेक प्रमाण भी मिलते हैं.

विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में, भारतियों द्वारा समुद्री यात्रा किए जाने के अनेक उल्लेख मिलते हैं. इसमे वरुण को समुद्र का देवता कहा गया हैं. ऋग्वेद के सूक्त कहते हैं की जहाजों (पोतों) द्वारा प्रयोग किए जाने वाले महासागरीय मार्गों का वरुण को अच्छा ज्ञान था. ऋग्वेद में इस बात का भी उल्लेख हैं की व्यापार और धन की खोज में व्यापारी, महासागर के रास्ते, दूसरे देशों में जाया करते थे.
वेद॑. यः. वी॒नाम्. प॒दम्. अ॒न्तरि॑क्षेण. पत॑ताम्. वेद॑. ना॒वः. स॒मु॒द्रियः॑॥ 1.25.7
अर्थ – (यः) जो (समुद्रियः) समुद्र अर्थात् अन्तरिक्ष वा जलमय प्रसिद्ध समुद्र में अपने पुरुषार्थ से युक्त विद्वान् मनुष्य (अन्तरिक्षेण) आकाश मार्ग से (पतताम्) जाने आने वाले (वीनाम्) विमान सब लोक वा पक्षियों के और समुद्र में जानेवाली (नावः) नौकाओं के (पदम्) रचन चालन ज्ञान और मार्ग को (वेद) जानता है वह शिल्पविद्या की सिद्धि के करने को समर्थ हो सकता है अन्य नहीं.
रामगोविंद त्रिवेदी ने ‘सायण भाष्य’ के आधार पर इसका अर्थ लगाया हैं – जो वरुण अन्तरिक्ष-चारी चिड़ियों का मार्ग और समुद्र की नौकाओं का मार्ग जानते हैं.
Ralph Thomas Hotchkin Griffith ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया हैं – He knows the path of birds that fly through heaven, and, Sovran of the sea, He knows the ships that are thereon.

विश्व का सबसे प्राचीन ‘टाइडल डॉक’ (Tidel Dock – ज्वार की गोदी), लगभग ५,००० वर्ष पहले गुजरात के ‘मांगरोल’ में बांधा गया था. तब मांगरोल यह समृध्द बंदरगाह था. आज वह जूनागढ़ जिले की छोटी से गोदी (बंदर) हैं.

भारत की विश्व व्यापार में हिस्सेदारी जब चरम पर थी, अर्थात पहली शताब्दी मे, वर्ष २३ से ७९ के बीच, ‘गेअस प्लिनस सिकंदस’ जिसे ‘प्लिनी द एल्डर’ कहा जाता हैं, ने भारत के बारे में बहुत कुछ लिख रखा हैं. अपनी मृत्यु के दो वर्ष पहले, अर्थात वर्ष ७७ में, उसने भारत के रोमन साम्राज्य से होने वाले व्यापार के बारे में विस्तृत लिख रखा हैं.

‘प्लिनी द एल्डर’ ने भारत, रोमन साम्राज्य को जो वस्तुएं निर्यात करता था, उसकी सूची भी दी हैं. यह मुख्यतः रोमन लेखक, इतिहासकार, चिंतक, विचारक, सेनानी और निसर्गप्रेमी व्यक्ति था. इसकी Naturalis Historia (नेचरल हिस्ट्री) यह पुस्तक प्रसिध्द हैं, जो मूलतः एक विश्वकोश हैं. इसकी एक और पुस्तक चर्चा में रहती हैं, जो जर्मनी के प्रवास पर आधारित हैं – De Origine et situ Germanorum (On the Origin and Situation of Germans). ‘प्लिनी द एल्ड़र’ ने रोमन साम्राज्य की नौसेना में काम किया हैं. इसी के आधार पर उसने भारतीय जहाजों की भव्यता के बारे में लिख रखा हैं.

पहली शताब्दी में ही एक ग्रीक नाविक कप्तान ने अपनी डायरी लिखी हैं, जो ‘पेरिप्लस ऑफ ईरिथ्रायीयन सी’ (Periplus of the Erythraean Sea) इस नाम से प्रसिध्द हैं. वर्ष ४० से ५० के बीच में यह डायरी लिखी गई हैं. इस मे कराची के पास, सिंधु नदी के मुहाने से लेकर तो सुदूर पूर्व मे, कोलकाता के पास, गंगा के मुहाने तक, सभी प्रमुख बंदरगांहों की सूची दी गई हैं. भडोच (भरुच) का, उन दिनों यूरोप के प्रमुख शहरों से व्यापार होता था, उसका भी वर्णन हैं. इस में उज्जैन, पैठन आदि समृध्द शहरों के भी उल्लेख मिलते हैं.

चंद्रगुप्त मौर्य के कालखंड में भारत के जहाज विश्वप्रसिद्ध थे. इन जहाज़ों के द्वारा विश्व भर में भारत का व्यापार चलता था. इस बारे में कई ताम्रपत्र और शिलालेख प्राप्त हुए हैं. बौद्ध प्रभाव वाले कालखंड में, छठी शताब्दी में, बंगाल में सिंहला (या सिंहबाहु ?) नामक राजा के शासनकाल में सात सौ यात्रियों को लेकर चले एक जहाज का, राजवालिया (Rajavalliya) में, श्रीलंका के प्रवास पर जाने का उल्लेख मिलता है. इस जहाज में राजा ने अपने पुत्र, राजकुमार विजय को श्रीलंका में भेजा था. जब विवाह करके ये जहाज वापस आया, तो उसमे, राजकुमार विजय की पत्नी, जो पाण्ड्य राजवंश की कन्या थी, के साथ ८०० यात्री थे. कुषाण काल एवं हर्षवर्धन काल में भी समुद्री व्यापार की समृद्ध परंपरा का उल्लेख मिलता है.

भारतीय नौकानयन के तथा भारतीय जहाजों के विश्वव्यापी और मजबूत पदचिन्ह यदि देखने हों तो बेरेनिके (Berenike) परियोजना का अभ्यास करना आवश्यक हो जाता है. बेरेनिके, इजिप्त का सर्वाधिक प्राचीन बंदरगाह है. स्वेज नहर के दक्षिण में ८०० किमी दूर स्थित यह बंदरगाह समुद्र के पश्चिमी तट पर है.

बेरेनिके परियोजना, पुरातत्त्व उत्खनन के कई प्रकल्पों में से एक, बहुत बड़ा प्रकल्प है. इस पर १९९४ में कार्य प्रारम्भ हुआ और आज भी खुदाई जारी है. नीदरलैंड फॉर साइंटिफिक रिसर्च, नैशनल जियोग्राफी, नीदरलैंड विदेश मंत्रालय, यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावर एवं अमेरिकन फिलोसोफिकल सोसायटी इन सभी ने संयुक्त रूप से इस परियोजना में अपना पैसा लगाया हुआ है.

ईसा पूर्व २७५ में टोलेमी-द्वितीय (Ptolemy-II) नामक इजिप्त के राजा ने लाल समुद्र के किनारे इस बंदरगाह का निर्माण किया था और उसे अपनी माता का नाम दिया – बेरेनिके. स्वाभाविक रूप से बेरेनिके एक उत्तम बंदरगाह तो था ही, परन्तु जलवायु की दृष्टि से भी व्यापारिक माल के लिए अनुकूल था. इस बंदरगाह से ऊंटों के माध्यम से माल की आवाजाही इजिप्त और अन्य पड़ोसी देशों में सहजता से होती है.

भारत की दृष्टि से इस परियोजना का महत्त्व यह है कि यहाँ पर खुदाई में अत्यधिक प्राचीन भारतीय वैश्विक व्यापार के ठोस सबूत प्राप्त हुए हैं. इस पुरातत्त्व उत्खनन में लगभग आठ किलो कालीमिर्च प्राप्त हुई है, जो कि निर्विवाद रूप से दक्षिण भारत में ही उगाई जाती थी. इसके अलावा भारत से निर्यात किए हुए कुछ कपड़े, चटाईयाँ और थैलियाँ भी मिली हैं. कार्बन डेटिंग में यह सारा सामान ईस्वी सन ३० से ईस्वी सन ७० तक के बीच का निकला है. इस उत्खनन में शोधकों को एक रोमन पेटी भी मिली, जिसमें भारत के ‘बटिक प्रिंट’ वाले कपड़े एवं भारतीय शैली में चित्रित कुछ कपड़े भी मिले.

इन सभी उत्खननों से सभी शोध वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि ईसापूर्व से दो-तीन हजार वर्ष पहले हिन्दू अपनी समृद्ध एवं सम्पन्न संस्कृति लेकर विश्व भर में प्रवास करते थे, व्यापार करते थे एवं अपने ज्ञान-विज्ञान की विरासत संसार को देते रहते थे. विश्व के अनेक स्थानों पर सबसे पहले पहुँचने वाले यदि कोई थे, तो वे हिन्दू नाविक एवं हिन्दू व्यापारी थे.

दुर्भाग्य से हमने अपने इतिहास को सही तरीके से संजोकर, संभालकर नहीं रखा, इसीलिए कोलंबस, वास्को-दि-गामा, मार्को पोलो, ह्वेन सांग जैसे नाम विश्वप्रसिद्ध हुए… लेकिन भारत के अनेक पराक्रमी नाविकों / व्यापारियों एवं राजाओं के नाम इतिहास की कालकोठरी में गुम हो गए.

डॉक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर, एक नामचीन पुरातत्ववेत्ता हैं. मध्यप्रदेश में आदिम युग के चिन्हों से युक्त ‘भीमबेटका’ गुफाओं की खोज इन्होंने ही की है. डॉक्टर शरद हेबालकर की पुस्तक में प्रस्तावना लिखते समय वाकणकर जी ने उनके वर्ष १९८४ के अमेरिका और मैक्सिको प्रवास का अनुभव लिखा है. इस प्रस्तावना में उन्होंने अमेरिका स्थित सैन दिएगो के पुरातत्व संग्रहालय के अध्यक्ष बेरीफेल का उल्लेख किया है. बेरीफेल महोदय ने मैक्सिको के उत्तर-पश्चिम में स्थित युकाटन राज्य के तावसुको नामक स्थान पर, माया संस्कृति के मंदिरों से प्राप्त ‘वासुलून” नाम के भारतीय महानाविक की भाषा एवं लिपि में लिखे गए सन्देश का उल्लेख किया है. और इसी तथ्य के माध्यम से बेरीफेल ने निर्विवाद रूप से सिद्ध किया है कि आठवीं और नौंवी शताब्दी में वहाँ भारतीय आते-जाते रहे हैं.

मौर्य, पल्लव, चोल आदि राजवंशों के काल में भारतीय नौकानयन शास्त्र अपने चरम पर था. उन्नत किसम के विशाल जहाज भारत में बनते थे.

१९५५ और १९६१ में गुजरात के ‘लोथल’ में पुरातत्व विभाग द्वारा उत्खनन किया गया था. लोथल भले ही एकदम समुद्र के किनारे पर स्थित नहीं है, परन्तु समुद्र की एक छोटी पट्टी लोथल तक आई हुई है. साबरमती नदी के मुहाने पर यह हैं. पुरातत्व विभाग के उत्खनन में यह सामने आया कि लगभग साढ़े तीन हजार वर्ष पहले लोथल एक वैभवशाली बंदरगाह था. इस स्थान पर अत्यंत उन्नत एवं साफ़-सुथरी उत्तम नगर संरचना स्थित थी. परन्तु उत्खनन से प्राप्त अवशेषों में इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह निकलकर आई कि लोथल में जहाज़ों के निर्माण का कारखाना था. लोथल से अरब देशों एवं इजिप्त देश में बड़े पैमाने पर व्यापारिक गतिविधियों के भी प्रमाण मिले.

लगभग सन १९५५ तक लोथल अथवा पश्चिमी भारत के नौकायन शास्त्र सम्बन्धित अधिक तथ्य हमारे पास नहीं थे. परन्तु लोथल में किए उत्खनन के कारण इस ज्ञान के दरवाजे दुनिया के सामने खुल गए. इस खुदाई से पता चला कि समुद्र किनारे पर स्थित नहीं होने के बावजूद लोथल में नौकायन विज्ञान इतना समृद्ध था, और वहाँ नौकायन से सम्बन्धित इतनी गतिविधियाँ लगातार चलती रहती थीं, तो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल जैसे दूसरे पश्चिमी राज्यों के समुद्र किनारों पर, इस बंदरगाह से भी अधिक कितनी ही सरस एवं समृद्ध संरचनाएं रही होंगी.

आज हम जिसे मुंबई में ‘नालासोपारा’ कहते हैं, वहाँ पर लगभग हजार / डेढ़ हजार वर्ष पहले ‘शुर्पारक’ नामक वैभवशाली बंदरगाह था. इस स्थान पर भारत के जहाज़ों के अलावा अनेक देशों के जहाज व्यापार करने आते थे. इसी प्रकार दाभोल.. इसी प्रकार सूरत…

आगे चलकर विजयनगर साम्राज्य स्थापित होने के बाद उस राज्य ने दक्षिण भारत में अनेक विशाल और सुन्दर बंदरगाहों का निर्माण किया तथा पूर्व एवं पश्चिम दोनों ही दिशाओं में व्यापार आरम्भ किया.

जावा, सुमात्रा, मलय, सिंहपुर, सयाम, यवद्वीप इत्यादि सभी तत्कालीन देश, जो वर्तमान में इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, कम्बोडिया, विएतनाम वगैरह नामों से जाने जाते हैं, इन सभी देशों पर हिन्दू संस्कृति की जबरदस्त छाप आज भी मौजूद है. दो-ढाई हजार वर्ष पूर्व दक्षिण भारत के हिन्दू राजा इन प्रदेशों में गए थे. ऐसा कोई भी तथ्य नहीं मिलता कि भारत से गए राजाओं ने वहाँ भीषण युद्ध किया हो. इसकी बजाय शांतिपूर्ण तरीके से, अपनी समृद्ध संस्कृति के बल पर समूचा दक्षिण-पूर्व एशिया धीरे-धीरे हिन्दू विचारों को अपना मानने लगा था.

अब एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि जब बड़े पैमाने पर हिन्दू राजा आंध्र, तमिलनाडु इत्यादि राज्यों से दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में गए, तो वे कैसे गए होंगे…? ज़ाहिर है कि समुद्री मार्ग से ही गए होंगे. अर्थात उस कालखंड में भारत में नौकायन शास्त्र अत्यंत उन्नत स्थिति में मौजूद था. उस कालखंड के भारतीय नौकाओं एवं नाविकों के अनेक चित्र एवं मूर्तियाँ कम्बोडिया, जावा, सुमात्रा, बाली जैसे स्थानों पर दिखाई देती हैं. उस काल में भी कम से कम सात सौ यात्रियों को ले जाने की क्षमता वाली नौकाओं का निर्माण भारत में होता था.

सुमात्रा द्वीप समूह, वर्तमान में इंडोनेशिया का एक हिस्सा हैं. इस द्वीप समूह में, एक पहाड़ पर ‘बोरबूदूर’ नाम का एक देवस्थान (मंदिर) हैं. इस मंदिर के दीवार पर अनेक चित्र उकेरे गए हैं, जिनमे भारतीय जहाजों के चित्र बहुतायत हैं. इन चित्रों में तत्कालीन भव्य और विशाल जहाज मिलते हैं.

उस काल में समुद्री यात्राओं की स्थिति को देखते हुए, यह निश्चित कहा जा सकता है कि भारतीयों के पास उत्तम दिशाज्ञान एवं समुद्री वातावरण की पूरी समझ थी, अन्यथा उस समय उफनते समुद्र में, आज जैसे आधुनिक मौसम यंत्र एवं यात्राओं संबंधी विभिन्न साधनों के नहीं होने के बावजूद, इतनी दूर के देशों तक पहुंचना, उन देशों से सम्बन्ध बनाना, वहां पर व्यापार करना, भारत जैसे देश के ‘एक्सटेंशन’ की तरह उन देशों से संपर्क लगातार बनाए रखना… इससे सिद्ध होता है कि भारतीयों का नौकायन शास्त्र उन दिनों अत्यधिक उन्नत रहा ही होगा.

अजंता की गुफाओं में जो चित्र बने हैं, उन में एक चित्र ईसा के ५४३ वर्ष पहले, श्रीलंका में जहाज ले कर गए हुए विजयसिंह का हैं. भोपाल के पास स्थित ‘सांची’ के स्तूप में भी अनेक प्राचीन चित्र बनाएं / उकेरे गए हैं. इन चित्रों में उस जमाने के एक विलासी जहाज का चित्र भी हैं. केरल के कड़क्करापल्ली में एक नाव (छोटा जहाज) के साबुत अवशेष मिले हैं. यह नाव वर्ष ९०० से वर्ष १२०० के बीच की होने की संभवना हैं. १४.५ मीटर लंबी और ४ मीटर चौड़ी यह नाव, किसी भी मानकों पर मजबूत इस श्रेणी में आती हैं.
(…..क्रमशः)

  • ✍🏻प्रशांत पोळ
    (सन्दर्भ सूची पोस्ट के दूसरे और अंतिम भाग में दी जाएगी)
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