गुरुकुल कैसे खत्म हो गये❓

आपको पहले ये बता दे कि हमारे सनातन संस्कृति परम्परा के गुरुकुल मे क्या क्या पढाई होती थी ! आर्यावर्त के गुरुकुल के बाद ऋषिकुल में क्या पढ़ाई होती थी ये जान लेना आवश्यक है । इस शिक्षा को लेकर अपने विचारों में परिवर्तन लायें और प्रचलित भ्रांतियां दूर करें !

01 अग्नि विद्या (Metallurgy)
02 वायु विद्या (Flight)
03 जल विद्या (Navigation)
04 अंतरिक्ष विद्या (Space Science)
05 पृथ्वी विद्या (Environment)
06 सूर्य विद्या (Solar Study)
07 चन्द्र व लोक विद्या (Lunar Study)
08 मेघ विद्या (Weather Forecast)
09 पदार्थ विद्युत विद्या (Battery)
10 सौर ऊर्जा विद्या (Solar Energy)
11 दिन रात्रि विद्या
12 सृष्टि विद्या (Space Research)
13 खगोल विद्या (Astronomy)
14 भूगोल विद्या (Geography)
15 काल विद्या (Time)
16 भूगर्भ विद्या (Geology Mining)
17 रत्न व धातु विद्या (Gems & Metals)
18 आकर्षण विद्या (Gravity)
19 प्रकाश विद्या (Solar Energy)
20 तार विद्या (Communication)
21 विमान विद्या (Plane)
22 जलयान विद्या (Water Vessels)
23 अग्नेय अस्त्र विद्या (Arms & Ammunition)
24 जीव जंतु विज्ञान विद्या (Zoology Botany)
25 यज्ञ विद्या (Material Sic)

ये तो बात हुई वैज्ञानिक विद्याओं की । अब बात करते है व्यावसायिक और तकनीकी विद्या की !

26 वाणिज्य (Commerce)
27 कृषि (Agriculture)
28 पशुपालन (Animal Husbandry)
29 पक्षिपलन (Bird Keeping)
30 पशु प्रशिक्षण (Animal Training)
31 यान यन्त्रकार (Mechanics)
32 रथकार (Vehicle Designing)
33 रतन्कार (Gems)
34 सुवर्णकार (Jewellery Designing)
35 वस्त्रकार (Textile)
36 कुम्भकार (Pottery)
37 लोहकार (Metallurgy)
38 तक्षक
39 रंगसाज (Dying)
40 खटवाकर
41 रज्जुकर (Logistics)
42 वास्तुकार (Architect)
43 पाकविद्या (Cooking)
44 सारथ्य (Driving)
45 नदी प्रबन्धक (Water Management)
46 सुचिकार (Data Entry)
47 गोशाला प्रबन्धक (Animal Husbandry)
48 उद्यान पाल (Horticulture)
49 वन पाल (Horticulture)
50 नापित (Paramedical)

यह सब विद्या गुरुकुल में सिखाई जाती थी पर समय के साथ गुरुकुल लुप्त हुए तो यह विद्या भी लुप्त होती गयी ! आज मैकाले पद्धति से हमारे देश के युवाओं का भविष्य नष्ट हो रहा तब ऐसे समय में गुरुकुल के पुनः उद्धार की आवश्यकता है।

भारतवर्ष में गुरुकुल कैसे खत्म हो गये ? कॉन्वेंट स्कूलों ने किया बर्बाद । 1858 में Indian Education Act बनाया गया। इसकी ड्राफ्टिंग ‘लोर्ड मैकाले’ ने की थी। लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी। अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W. Luther और दूसरा था Thomas Munro ! दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था। Luther, जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100% साक्षरता है ।

मैकाले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी “देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था” को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह “अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था” लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे ।

मैकाले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है – “कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी।” इस लिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया | जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज की तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी | फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया | उनमें आग लगा दी, उसमें पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा- पीटा, जेल में डाला।
1850 तक इस देश में ’7 लाख 32 हजार’ गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे ’7 लाख 50 हजार’ । मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में ‘Higher Learning Institute’ हुआ करते थे । उन सबमे 18 विषय पढाया जाता था और ये गुरुकुल समाज के लोग मिलके चलाते थे न कि राजा, महाराजा ।

गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी। इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया । उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था । इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी, ये तीनों गुलामी ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी देश में हैं !

मैकाले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमें वो लिखता है कि: “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा । इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।” उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है । अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा । हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा।

लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है । दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी भाषा सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है ॽ शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी । समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी।

संयुक्तराष्टसंघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी ! जिसमे लगभग वो विजय पा चुके क्योंकि आज का युवा भारत को कम यूरोप को ज्यादा जनता है । भारतीय संस्कृति को ढकोसला समझता है लेकिन पाश्चात्य देशों को नकल करता है । सनातन धर्म की प्रमुखता और विशेषता को न जानते हुए भी वामपंथियों का समर्थन करता है।

सभी बन्धुओ से एक चुभता सवाल हमसभी को धर्म की जानकारी होनी चाहिये । क्योंकि धर्म ही हमे राष्ट्र धर्म सिखाती है, धर्म ही हमे समाजिकता सिखाती है, धर्म ही हमे माता – पिता, गुरु और राष्ट्र के प्रति प्राण न्योछावर करने की प्रेरणा देती है। सनातन परंपरा एक आध्यात्मिक विज्ञान है, जिस विज्ञान को हम सभी आज जानते है उससे बहुत ही समृद्ध विज्ञान ही अध्यात्म है…

आयुर्वेद : इतिहास, उपादेयता एवं प्रासंगिकता

आयुर्वेद लिखनेवाले पुरुष को आप्त कहा जाता है, जिनको त्रिकाल (भूत, वर्तमान, भविष्य) का ज्ञान था। यद्यपि आयुर्वेद बहुत पुराने काल में लिखा गया है, तथापि वर्तमान में नये रूप में उभरनेवाली हर बीमारियों का समाधान इसमें समाहित है। आयुर्वेद मतलब जीवनविज्ञान है। अतः यह सिर्फ एक चिकित्सा-पद्धति नहीं है, जीवन से सम्बधित हर समस्या का समाधान इसमें समाहित है।

आयुर्वेद की उपयोगिता

आयुर्वेद के दो मुख्य प्रयोजन हैं :

  1. स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की करना।
  2. रोगी व्यक्ति के रोग की चिकित्सा ।

स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना।

स्वस्थ का मतलब सिर्फ रोगमुक्ति ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद के अनुसार एक व्यक्ति को स्वस्थ तब कहेंगे जब उसके दोषशारीरिक (वात, पित्त, कफ) तथा मानसिक (रज व तम) समान हों, अग्नि पाचनशक्ति) सामान्य हो, धातु (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र) हो, मल-मूत्रादि क्रिया उचित प्रमाण तथा समय पर हो तथा आत्मा, इन्द्रियाँ व प्रसन्न हो। आयुर्वेद के अनुसार सुख मतलब आरोग्य है एवं दुःख का मतलब रोग।

रोगी व्यक्ति के रोग की चिकित्सा

आयुर्वेद के अनुसार सम्पूर्ण चिकित्सा को त्रिविध रूप में विभाजित किया गया है ।

  1. देव व्यापाश्रय चिकित्सा ।
  2. युक्ति व्यापाश्रय चिकित्सा
  3. सत्त्वावजय-चिकित्सा

रोग मुख्यतः दो प्रकार का होता है ।

शारीरिक व मानसिक। शारीरिक रोग ठीक करने हेतु देव व्यापाश्रय व युक्ति व्यापाश्रय चिकित्सा की जाती है। जबकि मानसिक विकार को चिकित्सा हेतु सत्त्वावजयचिकित्सा की जाती है।

देव व्यापाश्रय चिकित्सा

मंत्रप्रयोग, औषधि-धारण, मणिधारण, मंगलकर्म, बलि (दान), उपहार, होम, नियम, प्रायश्चित्त, उपवास, प्रणिपात, गमन तीर्थयात्रा) आदि कर्म इस चिकित्सा के अन्तर्गत आते हैं।

युक्ति व्यापाश्रय चिकित्सा

यह आवश्यक आहार-विहार तथा औषधि द्रव्य द्वारा किया जाता है। आधुनिक चिकित्साशास्त्र में यह मुख्य चिकित्सा है। आयुर्वेद में भी आजकल ज्यादातर इसी के ऊपर ध्यान दिया जाता है जो कि अपूर्ण चिकित्सा है। औषधि-चिकित्सा के अन्तर्गत समस्त शस्त्र कर्म भी आ जाते हैं। जो मुख्यतः सुश्रुतसंहिता में वर्णित है।

सत्त्वावजय-चिकित्सा

इसका मतलब है अहित अर्थ से मन को दूर रखना। यह ज्ञान, विज्ञान (वेद, पुराण, धर्मग्रन्थ आदि), धैर्य, स्मृति (स्मरणशक्ति अर्थात् बीते हुए कर्म तथा उसके फल को याद रखना तथा पढ़े हुई या सुनी हुई अच्छी बातें याद रखना), समाधि आदि द्वारा मानसिक बीमारी ठीक की जा सकती । इस आरोग्यावस्था को बनाए रखने केलिये आयुर्वेद में विशद वर्णन है जिसको स्वस्थवृत्र कहा जाता है। स्वस्थवृत्त के अन्र्तगत निम्नलिखित उपदेश हैं :

दिनचर्या- प्रतिदिन की जानेवाली क्रियाएँ।

ऋतुचर्या- प्रत्येक ऋतु में आहार विहार में क्या विशेषता है यानि किस ऋतु में क्या-क्या आहार-विहार का सेवन करना चाहिये तथा क्या-क्या नहीं करना चाहिये का विशद वर्णन इसके अन्तर्गत किया गया है।

धारणीय व अधारणीय वेग- शरीर में स्वाभाविक रूप से कुछ शारीरिक एवं मानसिक क्रिया की इच्छा उत्पन्न होती हैं, जिनको वेग कहा जाता है। उनमें से कुछ वेग को रोकना चाहिये जिनको धारणीय वेग कहा जाता है। एवं कुछ वेग का बलपूर्वक नहीं रोकना चाहिये जिनको अधारणीय वेग कहा जाता है। धारणीय वेग को तीन भागों में बाँट सकते हैं- शारीरिक, वाचिक (बोलना) एवं मानसिक। शारीरिक यानि दूसरे को पीड़ा देनेवाले कर्म, परस्त्री संभोग, चोरी, हिंसा आदि; वाचिक में अत्यन्त कठोर वचन, चुगलखोरी, झूठ बोलना, अनुचित समय पर बोलना तथा अनावश्यक बातें करना आदि; मानसिक वेग के अंतर्गत लोभ, शोक, भय, क्रोध, अहंकार, निर्लज्जता, ईष्र्या, अतिराग, दूसरे का धन लेने की इच्छा आदि। इन वेगों को प्रयत्नपूर्वक धारण अर्थात् शरीर के अन्दर दबाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।अधारणीय वेग के अंतर्गत मल, मूत्र तथा अपानवायु का त्याग, वीर्यत्यागभूख, प्यास, डकार-जंभाई, छींक उल्टी, आँसू, निद्रा व श्रमजनित श्वास आदि वेग को नहीं रोकना चाहियेक्योंकि इनके वेग को धारण करने से नाना प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते ।

पञ्चकर्म द्वारा शरीरशुद्धि

चिकित्सा की दृष्टि से आयुर्वेद में पञ्चकर्म का बहुत महत्त्व है। उसके साथ-साथ शरीर को स्वस्थ बनाए रखने भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। ऋतु के हिसाब से शरीर में स्वाभाविक रूप में दोषवृद्धि होती है, उन दोनों को उपयुक्त ऋतु में पञ्चकर्म द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाए, तो आगे ऋतुजनित बीमारी नहीं होती है।

रसायन का सेवन- शरीरशुद्धि के बाद औषधि रसायन का सेवन करने से मनुष्य दीर्घायु, स्मरणशक्तिसम्पन्न, मेधा, आरोग्य, तरुणावस्था, प्रभा, वर्ण, वाणी की मधुरता, उत्तम बल प्राप्ति, वासिद्धि, नम्रता, कान्ति आदि सभी गुणों को प्राप्त करता है। इससे शिथिल मांसपेशियाँ दृढ़ होती हैं, जठराग्नि प्रद्दीप्त होती है, वात, पित्त, कफ सम रहते हैं, शरीर में स्थिरता उत्पन्न होती है। उदाहरणार्थ च्यवनप्राश, ब्रह्मरसायन, आमलकी रसायन, अगस्त्य रसायन तथा हरड़, आमला आदि। औषधि रसायन के अलावा एक आचार रसायन का भी वर्णन है जिसमें कुछ सदाचार बताया गया है जिनको पालन करने से औषधि रसायन सेवन किए बिना रसायन का फल प्राप्त कर सकते हैं, यथा- सत्य बोलना, अक्रोध, मद्य-मैथुन से दूर रहना, अहिंसा न करना, दान देना, देवता-गौ-ब्राह्मण, आचार्य, गुरुजनों व वृद्धजनों की पूजा व सेवा, उचित समय पर निद्रा त्यागना एवं सोना, अहंकार न करना, ज्यादा श्रम न करना, शान्त रहना, प्रियवादी बनना, पवित्रता में तत्पर, सदा दुग्ध व घृत सेवन, अपनी इन्द्रियों को आध्यात्मिक विषयों की ओर उन्मुख करना, आदि।

वाजीकरण का सेवन- शरीरशुद्धि के बाद गृहस्थ जीवन बितानेवाले को उत्तम सन्तान प्राप्ति हेतु तथा मैथुन में आसक्त पुरुष को वाजीकरण औषधिओं को सेवन करना चाहिये। इसके सेवन से यश, श्री, बल तथा पुष्टि की वृद्धि होती है, जैसेशतावरी, मुलेठी, अश्वगन्धा, घृत व दुग्ध, आदि।

प्रज्ञापराध का त्याग- धी, धृति, स्मृति के विभ्रंश होने से जो अशुभ कर्म किया जाता है, उसे प्रज्ञापराध कहते हैं। कर्म तीन प्रकार के होते हैंशारीरिक, वाचिक व मानसिक। इन तीनों कर्म के अतियोग (स्वाभाविक ज्यादा करना), हिनयोग स्वाभाविक से कम करना) तथा मिथ्यायोग (गलत कर्म, अस्वाभाविक कर्म) ही प्रज्ञापराध है। उपर्युक्त वर्णित धारणीय वेग शरीर, वाणी एवं मन के मिथ्यायोग में आते हैं। इसके इलावा मल-मूत्रादि वेग को रोकना या बलपूर्वक निकालना, विकृत मनुष्यों की नकल करना, प्राणवायु को ज्यादा समय रोकना, क्लेशजनक व्रतोपवास करना, आदि प्रज्ञापराध हैं जिनका त्याग करना चाहिये। प्रज्ञापराध मानसिक एवं आगन्तुक (अभिघात, दुर्घटना, आदि) रोग का मुख्य कारण है।

यहाँ पर विशाल आयुर्वेद का एक संक्षिप्त रूप में विवेचन किया गया है। एक वाक्य में कहा जाए तो आयुर्वेद एक सम्पूर्ण चिकित्साशास्त्र है न कि एक वैकल्पिक चिकित्सा जो जीर्ण व्याधियों के लिए है। भारत के पराधीनता के दौरान यह भी पराधीन हो गया था जो कि अभी भी पूर्णरूप से मुक्त नहीं हो पाया है।

इसके फलस्वरूप बीमारियाँ दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं, जिनको नियन्त्रण करने में आधुनिक चिकित्साशास्त्र भी विफल है। अतः आयुर्वेद को पुनः सम्पूर्ण स्वतंत्र करने का समय आ गया है। केवल आयुर्वेद के जरिए ही समाज को सम्पूर्ण स्वस्थ बनाना सम्भव है। इसके लिए आयुर्वेद में वर्णित स्वास्थवृत्त को अपनी जीवनशैली में अपनाना पड़ेगा तथा स्कूलों के पाठ्यक्रम में इसका समावेश करना पड़ेगा।
✍🏻सुबोध कुमार

अनिल कौशिश जी की पोस्ट्स:

● आयुर्वेद पर मेरे रोचक अनुभव -1
1973
तब हम सतियाँ चौक, माडल टाऊन, करनाल में एक किराये के मकान में रहा करते थे।
उस समय मेरे बाबा जी (दादा जी) भी हमारे पास आये हुए थे। एक दिन रविवार को हम दादा पोता सुबह 5 बजे घूमने निकले तो हम श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिर के सामने सरकारी खेतों में घुस गये।
वह क्षेत्र शायद कृषि अनुसंधान केन्द्र विभाग के का था।
वहाँ घूमते हुए मेरे बाबा जी की नज़र एक विशेष प्रकार के घास पर पड़ गयी जो कि इधर उधर और छिटपुट जगहों पर randomly उगी हुई थी।
उसे देख कर बाबा जी बोले कि हम कल एक खुरपा और एक बोरी लेकर आयेंगे और इस घास को उखाड़ कर घर ले जायेंगे।
अब मैं सोच में पड़ गया कि हमारे घर में बकरी तक तो है नहीं फिर हम इस घास का क्या करेंगे।

खै़र, अगले दिन हम वहाँ वह सामान लेकर गये और आधा कट्टा भर कर उस घास को लाये।
यह क्रम तीन दिनों तक चलता रहा।
फिर हम ने उस घास को सुखाया।
और, उसे एक कट्टे में भर लिया।
फिर बाबा जी मुझ से बोले कि इस घास को लेकर कर्ण गेट पर फलाने पंसारी के यहाँ बेच कर आ।
और हाँ, इसे तुमने डेढ़ रू किलो से कम नहीं बेचना है। अब चूँकि उस समय बाबा जी की टाँग में चोट लगी हुई थी तो वे पैदल अधिक नहीं चल सकते थे तो मैं उस कट्टे को सिर पर लाद कर चल पड़ा।

उस दुकान पर पहुँचा तो पंसारी उस घास को देख कर कुछ हैरान हो गया और बोला कि तुम इतने छोटे बच्चे (15 वर्ष) हो तो तुम्हें इस घास के विषय बारे मैं किसने बताया। तो मैंने उसे बताया कि मैं पं. जीवा राम पंसारी का पोता हूँ और उन्होंने मुझे यहाँ भेजा है। इस पर वह पंसारी संतुष्ट हुआ, फिर उस घास को कट्टे में से निकाल कर तोला गया और उसका मोल भाव किया गया। आख़िर वह पंसारी उस 3 किलो घास को 1 रु 60 पैसे किलो के हिसाब से खरीदने को राज़ी हुआ और उसने मुझे 4 रु 80 पैसे पकड़ा दिये और मैं घर की ओर चल पड़ा।

अब आप यह तो सोच ही रहे होंगे कि वह ऐसी कौनसी रामबाण टाइप घास थी जो कि 1973 में अर्थात् आज से 48 वर्ष पहले 1 रु 60 पैसे किलो बिक गयी थी। उन दिनों तो गेहूँ का आटा ही 60-70 पैसे किलो मिल जाता था तो वह घास ऐसी क्या अफलातून थी जो कि इतनी महँगी बिकी थी?

■ उस घास का नाम है शंखपुष्पी।
अब शंखपुष्पी क्या है और इसका सेवन करने से हमें क्या लाभ हो सकता है यह आप गूगल पर खोज सकते हैं।

✍️ अनिल कौशिश

● आयुर्वेद पर मेरे रोचक अनुभव -2

मेरे बाबा जी (दादा जी) आर्थिक अभावों के चलते दूसरी तीसरी कक्षा से आगे पढ़ नहीं पाये…
तो वे एक देसी वैद्य को गुरु मान कर उन के पास 2-3 रु मासिक वेतन पर काम करने लगे थे।
उन्होंने 20-25 वर्षों तक हाड़ तोड़ परिश्रम करके आयुर्वेद का काम सीखा और बाद में उन्होंने वैद्य और पंसारी की स्वयं की दुकान खोल ली। उनके हाथों में इतना यश था कि उनकी प्रसिद्धि आसपास के गाँवों तक हो गयी थी। 1972 आते-आते वे वृद्ध हो चले थे और वे स्वयं के सभी पारिवारिक दायित्वों से मुक्त हो चुके थे। तो वे वह दुकान छोड़ कर दूसरे नगरों में सरकारी नौकरी कर रहे अपने पुत्रों के पास रहने लगे थे।
1975
तब मेरे बाऊ जी का स्थानांतरण चरखी दादरी, जिला भिवानी का हो गया था तो तब हम वहाँ किराये के एक मकान में रहने लगे थे। उन दिनों बाबा जी हमारे पास आये हुए थे।

एक दिन उन्होंने देखा कि पड़ौस में एक युवती को उसके दो परिजन रिक्शा से उतार कर घर में ले जा रहे थे।
वह युवती दोनों हाथों से पेट पकड़े हुए कराह रही थी।
तो बाबा जी भी उनके घर पहुँच गये।
वहाँ उन्हें बताया गया कि उस युवती को 2 दिनों से पेट में तीखा दर्द था।
उसे दो डॉक्टरों को दिखाया गया था परंतु उसे कोई आराम नहीं हुआ था।
तब वे उसे मैडिकल कॉलेज, रोहतक ले जाने की सोच रहे थे।
इस पर मेरे बाबा जी बोले कि वे भी कुछ प्रयास करके देखते हैं।
उन्होंने उस युवती के पेट को टटोल कर देखा और वे लाठी टेकते हुए बाजार की ओर चल दिये।
वे आधे घंटे में एक पंसारी से 20-25 पैसों में एक देसी दवा खरीद लाये।

घर पहुँचते ही उन्होंने आधा लीटर दूध मँगवाया और वह दवा उस में डाल दी और कहा कि इस दूध के आधा रह जाने तक तेज आँच पर उबाला जाये फिर युवती को गर्मागर्म पिलाया जाये।
उन्होंने ऐसा ही किया तो उस युवती का पेट दर्द दूध पीने के आधे घंटे मे ही ठीक हो गया था।

युवती को पेट दर्द क्यों था?

किसी कारण से उसकी आंतड़ियों के एक भाग में मल जम कर इतना सड़ चुका था कि वह कोयले जैसा काला पड़ गया था।
उस जमे और सड़े हुए मल के कारण ही युवती के पेट में तेज दर्द हो रहा था।
अब उन दिनों बीमार के परीक्षण के लिये एक्स रे के इलावा सीटी स्कैन इत्यादि तो होता नहीं था और मल एक्स रे में आता नहीं है तो वे डॉक्टर किसी निष्कर्ष पर पहुँच नहीं पाये थे तो वे युवती का पेट दर्द ठीक नहीं कर पाये थे।

अब आप यह तो सोच ही रहे होंगे कि जिस पेट दर्द को डिग्री धारी डॉक्टर ठीक नहीं कर सके उसे एक अनपढ़ वैद्य ने 20-25 पैसे की देसी दवा से कैसे ठीक कर दिया था और वह दवा कौनसी है।

वह दवा है अमलतास अर्थात् अमलतास वृक्ष पर लगी गहरे भूरे रंग की फलियाँ। अमलतास की फलियों को तोड़ कर उनका गूदा निकाला गया और उसे दूध में खूब उबाल कर युवती को गर्मागर्म पिलाया गया तो उसके आधे घंटे बाद ही उसकी आंतड़ियों में जम कर सड़ा हुआ मल निकल गया तो उस युवती का पेट दर्द ठीक हो गया।

इस पर उस युवती के परिजन बड़े प्रसन्न हुए और उन्होंने बाबा जी को कुछ रुपये देने चाहे तो उन्होंने लेने से मना कर दिया।
फिर बाद में उन्होंने मेरे बाबा जी को किसी अवसर पर जिमा कर उन्हें नकद दक्षिणा और एक जोड़ा वस्त्र दिये थे।

■ Disclaimer: इस पोस्ट को पढ़ कर स्वयं या दूसरे बंधु पर किसी कुशल वैद्य के परामर्श पर ही पेट दर्द / कब्ज के इलाज की इस विधि को अपनायें।
✍️ अनिल कौशिश

भारत में आँखों की सर्जरी का इतिहास दो सौ वर्ष पुराना
Written by:- सुरेश चिपलूनकर
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भारत में 200 वर्ष पहले आँखों की सर्जरी होती थी…शीर्षक देखकर आप निश्चित ही चौंके होंगे ना!!! बिलकुल, अक्सर यही होता है जब हम भारत के किसी प्राचीन ज्ञान अथवा इतिहास के किसी विद्वान के बारे में बताते हैं तो सहसा विश्वास ही नहीं होता. क्योंकि भारतीय संस्कृति और इतिहास की तरफ देखने का हमारा दृष्टिकोण ऐसा बना दिया गया है

मानो हम कुछ हैं ही नहीं, जो भी हमें मिला है वह सिर्फ और सिर्फ पश्चिम और अंग्रेज विद्वानों की देन है. जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है. भारत के ही कई ग्रंथों एवं गूढ़ भाषा में मनीषियों द्वारा लिखे गए दस्तावेजों से पश्चिम ने बहुत ज्ञान प्राप्त किया है… परन्तु “गुलाम मानसिकता” के कारण हमने अपने ही ज्ञान और विद्वानों को भुला दिया है.
भारत के दक्षिण में स्थित है तंजावूर. छत्रपति शिवाजी महाराज ने यहाँ सन 1675 में मराठा साम्राज्य की स्थापना की थी तथा उनके भाई वेंकोजी को इसकी कमान सौंपी थी. तंजावूर में मराठा शासन लगभग अठारहवीं शताब्दी के अंत तक रहा. इसी दौरान एक विद्वान राजा हुए जिनका नाम था “राजा सरफोजी”. इन्होंने भी इस कालखंड के एक टुकड़े 1798 से 1832 तक यहाँ शासन किया. राजा सरफोजी को “नयन रोग” विशेषज्ञ माना जाता था. चेन्नई के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सालय “शंकरा नेत्रालय” के नयन विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं प्रयोगशाला सहायकों की एक टीम ने डॉक्टर आर नागस्वामी (जो तमिलनाडु सरकार के आर्कियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष तथा कांचीपुरम विवि के सेवानिवृत्त कुलपति थे) के साथ मिलकर राजा सरफोजी के वंशज श्री बाबा भोंसले से मिले. भोंसले साहब के पास राजा सरफोजी द्वारा उस जमाने में चिकित्सा किए गए रोगियों के पर्चे मिले जो हाथ से मोड़ी और प्राकृत भाषा में लिखे हुए थे. इन हस्तलिखित पर्चों को इन्डियन जर्नल ऑफ औप्थैल्मिक में प्रकाशित किया गया.

प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार राजा सरफोजी “धनवंतरी महल” के नाम से आँखों का अस्पताल चलाते थे जहाँ उनके सहायक एक अंग्रेज डॉक्टर मैक्बीन थे. शंकर नेत्रालय के निदेशक डॉक्टर ज्योतिर्मय बिस्वास ने बताया कि इस वर्ष दुबई में आयोजित विश्व औपथेल्मोलौजी अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हमने इसी विषय पर अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया और विशेषज्ञों ने माना कि नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में सारा क्रेडिट अक्सर यूरोपीय चिकित्सकों को दे दिया जाता है जबकि भारत में उस काल में की जाने वाले आई-सर्जरी को कोई स्थान ही नहीं है. डॉक्टर बिस्वास एवं शंकरा नेत्रालय चेन्नई की टीम ने मराठा शासक राजा सरफोजी के कालखंड की हस्तलिखित प्रतिलिपियों में पाँच वर्ष से साठ वर्ष के 44 मरीजों का स्पष्ट रिकॉर्ड प्राप्त किया. प्राप्त अंतिम रिकॉर्ड के अनुसार राजा सर्फोजी ने 9 सितम्बर 1827 को एक ऑपरेशन किया था, जिसमें किसी “विशिष्ट नीले रंग की गोली” का ज़िक्र है. इस विशिष्ट गोली का ज़िक्र इससे पहले भी कई बार आया हुआ है, परन्तु इस दवाई की संरचना एवं इसमें प्रयुक्त रसायनों के बारे में कोई नहीं जानता. राजा सरफोजी द्वारा आँखों के ऑपरेशन के बाद इस नीली गोली के चार डोज़ दिए जाने के सबूत भी मिलते हैं.

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार ऑपरेशन में बेलाडोना पट्टी, मछली का तेल, चौक पावडर तथा पिपरमेंट के उपयोग का उल्लेख मिलता है. साथ ही जो मरीज उन दिनों ऑपरेशन के लिए राजी हो जाते थे, उन्हें ठीक होने के बाद प्रोत्साहन राशि एवं ईनाम के रूप में “पूरे दो रूपए” दिए जाते थे, जो उन दिनों भारी भरकम राशि मानी जाती थी. कहने का तात्पर्य यह है कि भारतीय इतिहास और संस्कृति में ऐसा बहुत कुछ छिपा हुआ है (बल्कि जानबूझकर छिपाया गया है) जिसे जानने-समझने और जनता तक पहुँचाने की जरूरत है… अन्यथा पश्चिमी और वामपंथी इतिहासकारों द्वारा भारतीयों को खामख्वाह “हीनभावना” से ग्रसित रखे जाने का जो षडयंत्र रचा गया है उसे छिन्न-भिन्न कैसे किया जाएगा… (आजकल के बच्चों को तो यह भी नहीं मालूम कि “मराठा साम्राज्य”, और “विजयनगरम साम्राज्य” नाम का एक विशाल शौर्यपूर्ण इतिहास मौजूद है… वे तो सिर्फ मुग़ल साम्राज्य के बारे में जानते हैं…).

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Vehicles flashing caste names on their number plates’, Regional Transport Officer, Lucknow

Action against vehicles flashing caste names in Uttar Pradesh

LUCKNOW: UP transport department has issued an order to all its RTOs, ARTOs and enforcement officers to take necessary action under the MV Act against vehicles that are found on road with the caste of the owner displayed on the number plate. The order has been issued by additional transport commissioner (administration), Mukesh Chandra tagging a letter which was addressed to Prime Minister Narendra Modi on Integrated Grievance Redressal System (IGRS) and which said that displaying caste-based names on number plates is a trend in UP and many other states. REMOVE ADS The letter written by Harshpal Prabhu from Maharashtra on December 4 said “it’s a superiority complex” and should be checked “to stop caste-based crime.” As this letter went viral with news reports that UP transport department has issued an order for ‘seizure of vehicles flashing caste names on their number plates’, Regional Transport Officer, Lucknow, Ramfer Dwivedi, told TOI that anything inscribed on the number plate is already an offence under the Motor V Act which attracts a penalty of Rs 500 first time and Rs 1,500 on subsequent offence. “There is no law to seize the vehicle as of now,” he added. “It is not a new order as writing anything on the number plate beyond the registration number is already an offence under MV Act. The order is to reinforce the provision. The number plate should only display the number in defined font so that it is clearly visible like we have in HSRP,” said Chandra, who issued the order. The caste is displayed to glorify it, said Prabhu’s letter adding that such glorification must be stopped as it can lead to rivalry, which can create law and order situation in the state. EXPLORE BRIEFS NEWS IN BRIEF Your one-minute news catch up Trump and US on edge as Democrats on verge of trifecta The yet-to-be certified results, which strengthened the hands of the Democratic Party and is a setback to President Donald Trump and his insurgent supporters who continue to ply bogus charges election fraud, came even as a joint session of the US Congress convened in the capital to formally recognize Joe Biden as the country’s 46th President. ‘Migratory birds reason behind spread of bird flu in India’ The Centre has issued an advisory to the state on the spread of bird flu in the country, said Union minister of fisheries, animal husbandry and dairying Giriraj Singh on Wednesday, adding that the virus has returned to India with migratory birds. Modi ‘earned and achieved’ prime ministership: Pranab in memoir The decisive mandate the BJP got in two consecutive general elections in 2014 and 2019 indicated voters’ preference for political stability, according to late former president Pranab Mukherjee, who said Narendra Modi “earned and achieved” the prime ministership. He said that Narendra Modi became PM “through popular choice” unlike Manmohan Singh “who was offered the post by Sonia Gandhi”. What SC said on notional income for homemakers In a significant ruling, the Supreme Court has said that fixing notional income of homemakers in compensation related cases is a signal to the society that the law and the courts value their labour, services and sacrifices. Another nationwide vaccine dry run to be held on Jan 8 Ahead of the roll-out of coronavirus vaccine in few days, another dry-run will be conducted across the country on January 8. On January 2, almost all states and Union territories conducted dry run at 285 session sites spread across 125 districts to assess ability and readiness of authorities to administer shots to hundreds of millions of people, including many in remote corners of the country. Centre deploys teams to bird flu-hit districts of Kerala, Haryana The Union health ministry said it has deployed multi-disciplinary teams to avian influenza-affected Alappuzha and Kottayam districts of Kerala, and Panchkula district of Haryana. On Monday, avian influenza (H5N8) in samples of duck carcasses from Alappuzha and Kottayam districts in Kerala was notified by the animal husbandry department. GO TO BRIEFS After the letter was received, the transport department will check vehicles plying in the state and take action against those flouting norms. Additional chief secretary, Information, Navneet Sehgal, told TOI: “There is no new order of seizure of vehicles displaying caste and name, there is already a law which operates to challan vehicles that use such number plates,” he said. Similarly, Uttar Pradesh Transport Commissioner, Dheeraj Sahu told TOI that the letter on social media in connection with the case has been misinterpreted. “There is no word on seizure of vehicles having caste and names inscribed on number plates,” he said.

घर बैठे खुद आधार कार्ड में बदलें अपना पता या मोबाइल नंबर, जानें क्या है इसका तरीका

By: Karishma Lalwani | Published: 06 Jan 2021, 10:50 AM IST आधार कार्ड (Aadhaar Card) एक ऐसा जरूरी दस्तावेज जिसकी जरूरत लगभग सभी तरह के सरकारी कामों के लिए पड़ती है। इसमें व्यक्ति से जुड़ी दी गई सभी जानकारियां अहम होती हैं। लखनऊ. आधार कार्ड (Aadhaar Card) एक ऐसा जरूरी दस्तावेज जिसकी जरूरत लगभग सभी तरह के सरकारी कामों के लिए पड़ती है। इसमें व्यक्ति से जुड़ी दी गई सभी जानकारियां अहम होती हैं। एक भी गलत जानकारी पर व्यक्ति परेशानी में फंस सकता है व आधार कार्ड की वजह से उसका संबंधित कार्य तक बाधित हो सकता है। कई बार ऐसा होता है कि आप अपने आधार कार्ड में किसी जानकारी मसलन नाम, पता या नंबर अपेडट कराना चाहते हैं लेकिन इसका सही तरीका नहीं पता होता। ऐसे में हम आपको खुद से ही आधार कार्ड में किसी तरह का बदलाव करने का आसान तरीका बताने जा रहे हैं। इसकि जरिये आप घर बैठे ही आधार कार्ड में दी गई जानकारी को अपडेट कर सकते हैं। आधार एक 12 अंकों का युनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर है जिसे भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। आधार से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लेने के लिए आपको पहले अपना मोबाइल नंबर यूआईडीएआई (UIDAI) के साथ रजिस्टर करना आवश्‍यक है। उदाहरण के लिए अगर आपका मोबाइल नंबर खो गया है या किसी अन्य कारण से आप अपने आधार कार्ड पर दिए गए नंबर को बदलने की इच्छा रखते हैं तो आगे दिये गये स्टेप्स को जरूर जान लें। इस तरह अपडेट करें मोबाइल नंबर – कंप्यूटर या लैपटॉप के माध्यम से सबसे आधार के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। – अपने मोबाइल नंबर और कैपचा की मदद से लॉग इन डिटेल्स भर दें। – डिटेल्स भरने के बाद आपसे ओटीपी की जानकारी मांगी जाएगी। – ओटीपी को दाईं ओर दिए गए बॉक्स में डाल दें और सबमिट ओटीपी पर क्लिक कर दें। – अगले पेज पर आपको आधार सर्विसेज़ न्यू एनरोलमेंट और अपडेट आधार के विकल्प नजर आएंगे, यहां अपडेट आधार पर क्लिक कर दें। – अगली स्क्रीन पर आपको नाम, आधार नंबर, रेसिडेंट टाइप और आप क्या अपडेट करना चाहते हैं जैसे विकल्प नजर आयेंगे। – इस पेज पर ‘What Do You Want To Update’ सेक्शन आएगा। इस पर मोबाइल नंबर चुनें। – इसके बाद अगले पेज पर आपसे आपका मोबाइल नंबर संबंधित अन्य जानकारी भरने को कहा जाएगा। सभी फील्ड्स को भर कर सेंड औटीपी पर क्लिक कर दें। – आपके मोबाइल पर ओटीपी नंबर आएगा। इसे एंटर करने के बाद वेरिफाई करें। – इसके बाद सेव एंड प्रोसीड पर क्लिक कर दें। – इतना करने के बाद आपको एप्पोइंटमेंट आईडी के साथ सक्सेस स्क्रीन मिलेगी। बुक अपॉइंटमेंट ऑप्शन पर क्लिक कर दें और आधार एनरोलमेंट सेंटर पर स्लॉट बुक करें। बिना ओटीपी के कैसे करें अपडेट – आधार एनरोलमेंट या अपडेट सेंटर पर पहुंचे। – यहां आप आधार अपडेट का फॉर्म भर दें। – अपना मौजूदा मोबाइल नंबर फॉर्म पर लिख दें। यह मौजूदा नंबर वही नंबर होना चाहिए जिसे आप अपडेट करना चाहते हैं। – एक्यूजेटिव आपकी रिक्वेस्ट रजिस्टर करने का काम करेगा। – आपको एक एकनोलेजमेंट स्लिप प्राप्त होगी जिस पर यूआरएन अपडेट रिक्वेस्ट नंबर दर्ज होगा। – इस सर्विस के लिए 25 रुपये का चार्ज आपसे लिया जाएगा। एड्रेस बदलने के लिए अपनाएं ये तरीका अगर आप आधार कार्ड में अपने घर का पता भी बदलना चाहते हैं तो भी आपको घबराने की या भागादौड़ी करने की जरूरत नहीं है। आप यूआईडीएआई की वेबसाइट पर जाकर अपना पता अपडेट कर सकते हैं। इसे कैसे करना है, आइये जानते हैं। – यूआईडीएआई की वेबसाइट पर जाऐं और पता अपडेट रिक्वेस्ट (ऑनलाइन) पर क्लिक कर दें। – आपके सामने नया पेज खुलेगा जिसके बाद नीचे की ओर मौजूद प्रोसीड बटन पर टैप करें। – यहां अपना आधार नंबर डालें और इसके बाद जो ओटीपी आपको भेजा गया है उसे डालें। (यह नंबर आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए।) – इसके बाद आपसे पूछा जाएगा कि आप आधार कार्ड का पता एरिया पिन कॉड के द्वारा बदलना चाहते हैं या पता के द्वारा। – ऑप्शन्स पर क्लिक करने के बाद आपको अगले पेज पर ज़रूरी जानकारी भर कर सब्मिट करना होगा। – अब आपको आधार कार्ड में पता बदलने के लिए अपना सही पते की जानकारी कागजात के साथ उपलब्ध करवानी होगी। आप इसके लिए पासपोर्ट, इंश्योरेंस पॉलिसी, क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, टेलिफोन बिल (लैंडलाइन), प्रॉपर्टी टैक्स रिसिप्ट आदि में से कोई प्रुफ को आधार बना सकते हैं।

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