
बिहार स्थित नालंदा के जगदीशपुर गाँव में जिसे लोग रुक्मिणी – स्थान कहते थे, वह बौद्ध – स्थल है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के उत्खनन से यह स्पष्ट हुआ है।
पहली तसवीर गौतम बुद्ध की मूर्ति की है। दूसरी तसवीर गौतम बुद्ध की मूर्ति के नीचे बने एक दृश्य का है। भ्रम इसी दृश्य को लेकर हुआ। इस दृश्य में गौतम बुद्ध के जन्म के समय उनकी माता पर हुए मार आक्रमण का चित्रण है। लोगों ने भ्रमवश इस चित्रण को रुक्मिणी के अपहरण से जोड़ लिया।
बस क्या था? इसे रुक्मिणी देवी मानकर आज से 60 साल पहले लोगों ने मंदिर बना दिया और रुक्मिणी देवी की पूजा करने लगे। तीसरी तसवीर उसी मंदिर की है।
( साभार: दैनिक भास्कर 26 सितंबर, 2015 )
पुरातात्विक दृष्टिकोण से भारत में पहला अनुवाद कंधार शिलालेख के रूप में सम्राट अशोक ने बुद्ध के संदेशों को संप्रेषित करने के लिए कराया था…..
अनुवाद से यवन और कंबोज लोगों को बुद्ध के संदेशों को जानने में सुविधा हुई ….
कंधार का यह द्विभाषी शिलालेख ग्रीक भाषा में है, जिसका अनुवाद उसके बाजू में ही आरमेइक भाषा में है…..
इसे खोजने का श्रेय एक स्कूल के हैडमास्टर अब्दुल बे अशन को है….
इसी शिलालेख से हमें पता चलता है कि धम्म का सही अर्थ ” युसेबेइया ” है और ग्रीक में युसेबेइया का मतलब करुणा से है……
भारत में धम्म का मतलब जो रिलिजन समझा जाता है, वह सही नहीं है। यदि धम्म का मतलब धर्म होता तो सम्राट अशोक धम्म का ग्रीक अनुवाद थ्रिस्किया कराते…..
कभी-कभी अनुवाद बड़े काम की चीज होती है….
” सम्राट अशोक का सही इतिहास ” का गुजराती अनुवाद आ गया है। इसे भारतीय लोक कल्याण समिति, तापी ( गुजरात ) ने छापा है….
इसे अनूदित किया है डाॅ. अरविंद अरहंत ने…..
डाॅ. अरविंद अरहंत को बधाई एवं शुभकामनाएँ!


